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फांसी.. एक छोटी सजा हैं


छोटा सा सवाल मेरा..
दिल्ली दिलवालो की..
या बलात्कारियो की..
जहाँ सीएम एक औरत..
वहाँ औरतो का ही..
आया समय मनहूस..
आजादी के 65 साल बाद भी..
यह कैसी आजादी है..
जहाँ इज्जत की..

कल की रात


कल की रात,
बैठे थे हम चार यार,
मैं,
मेरी तन्हाई,
मेरे आंसू
और उसकी यादे,
बात हो रही थी बेवफाई की,
कोई सुना रहा था अपना गम,
कोई बांट रहा था अपना दर्द,
मगर यादें थी खामोश,
मैनें उससे एक सवाल किया,
उसने कुछ युं जवाब दिया,
कैसे अपना हाल-ए-दर्द बयान करू,
अच्छी यादें याद करू,
तो बुरी याद आ जाती है,
बुरी यादें याद करू,
तो अच्छी याद आ जाती हैं,
अचानक आंसू कुछ बडबडाया,