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इश्क गजब का शहर हैं..

इश्क गजब का शहर हैं..
यहाँ करोडो की भीड हैं..
दिल एक पर आता है..
प्यार करना आता नहीं..
फिर भी किसी अजनबी पर..
प्यार आ जाता हैं..

चल पडते हैं इश्क के सफर पर..
सफर में ही रह जाते हैं..
थामे हाथ लोग कसमें खाते..
कसमें ही जुदा कर देती हैं..

न जाने कितने दिल टुटे..
मिलकर भी कुछ ना मिले..
कुछ दिल ऐसे मिले..

कल की रात


कल की रात,
बैठे थे हम चार यार,
मैं,
मेरी तन्हाई,
मेरे आंसू
और उसकी यादे,
बात हो रही थी बेवफाई की,
कोई सुना रहा था अपना गम,
कोई बांट रहा था अपना दर्द,
मगर यादें थी खामोश,
मैनें उससे एक सवाल किया,
उसने कुछ युं जवाब दिया,
कैसे अपना हाल-ए-दर्द बयान करू,
अच्छी यादें याद करू,
तो बुरी याद आ जाती है,
बुरी यादें याद करू,
तो अच्छी याद आ जाती हैं,
अचानक आंसू कुछ बडबडाया,