सुना था बचपन में..
मेरा देश हैं अन्नदाता..
यकीन तब हुआ..
जब गोदामो में अन्न..
सडकर बर्बाद हुआ..
कुछ फर्क न पडा..
इन सफेद कुर्ते वालो को..
पर एक किसान की..
मेहनत का तो मजाक बना..

संसद में मिलता हैं..