iss weekand pe ek new poem from my heart....for everybody whoose khoye khoye se rehte hai....dube dube se rehte hai....



कोई खामोशी,
दिल को खाए जा रही हैं,
कोई बैचैनी,
दिल को छुए जा रही हैं,
कुछ तो बात जरुर हैं,
आजकल के फसानो में,
की खोया खोया सा रहता हूँ,
डूबा डूबा सा रहता हूँ....

लहरों की तरह,
हम भी बहा करते थे,