पिछली कड़ी:- दी एस्कॉर्ट हार्ट -8-(एक्सट्रीकेट टू रोजलीन)


“कौन हैं यह लड़की?”-एक डायन ने आसीन से पूछा.

“परी,  उसके पिता डामिन के राजा सोबरीन थे व उसकी माँ एक परी, जब सोबरीन कास्टरिका पर हमले के लिये जा रहा था तब अपनी मौत को करीब आते देख क्रिस्टन जंगल में छिपा था और फिर मैंने उसकी मदद की, मैंने सोबरीन को युद्ध में मार डाला ”-आसीन ने उदासी भरे स्वर में बोली और अपनी नजरें झुका दी. सभी डायनों के चेहरे का रंग उड़ गया. उनका गला मानो सुख चूका हो, वैसे वे खामोश रोजलीन को देख रही थी. रोजलीन गुस्सैल निगाहों से सबको देख रही थी.

“हमनें अपनी सबसे बड़ी दुश्मन की मदद की, इवान्स ने इतना बड़ा धोखा दिया”-एक डायन इवान्स पर चिल्लाई.

“बहुत-बहुत शुक्रिया मुझे छुड़ाने के लिए, लेकिन मैं अपने माता-पिता के हत्यारी को नहीं छोड़ सकती”-रोजलीन आवेश में बोलते आसीन की तरफ बढ़ने लगी. वहां मौजुद सभी डायने रोजलीन की तरफ बढ़ने लगी.

“रुको!”-इवान्स चिल्लाया. तभी रोजलीन का सिर चकराने लगा और जमीन पर बेहोश गिर गई. सब डायने रुक गई. इवान्स रोजलीन के करीब भागा. उसे उठाकर एक घर के भीतर ले गया. सभी डायनों ने एक साथ आसीन की तरफ देखा.

“मुझे माफ़ कर देना, लेकिन मुझे स्वयं को नहीं पता था कि इवान्स जिस लड़की से प्यार करता हैं, जिसे वो छुड़ाने की लिये मदद मांग रहा हैं, वो एक परी हैं”-आसीन ने हाथ जोड़ सबसे माफ़ी मांगी.

“तो फिर क्या सोचा तुमने आसीन?”-एक डायन बोली.

“परी को खत्म कर दो और जो बीच में आये उसे भी, चाहे वो इवान्स ही क्यूँ न हो”-इवान्स का नाम लेते ही आसीन की आँखों से आंसू टपकने लगे.



                      2-4 डायने घर के भीतर गई और जोर से चिल्लाई. इवान्स व रोजलीन भीतर नहीं थे.

“पीछा करो उनका, वो ज्यादा दूर नहीं गयें होंगे”

                      घना, हरा-भरा, भयानक जंगल, काली अँधेरी रात. इवान्स, बेहोश रोजलीन को अपने हाथों में उठाएं भाग रहा था. डायने जंगल के भीतर उन्हें चप्पे-चप्पे पर ढूंढ रही थी. तभी उन्हें कुछ अंदेशा हुआ. वो सब उलटे पाँव लौटने लगी. हवा में तैरते बहुत सी पारदर्शी आकृति(भूतो) ने डायनों पर धावा बोल दिया. भूतो से अपनी जान बचाते-बचाते डायने जंगल से बाहर खदेड़ी गई.

                      काफी देर भागते-भागते इवान्स थक चूका था. उसे लगा कि शायद वो काफी दूर आ चूका हैं डफलीन से. उसने रोजलीन को एक पेड़ के सहारे लेटा दिया. स्वयं उसके सामने वाले पेड़ का सहारा लेकर बैठ गया. वो रोजलीन के चेहरे को प्यार भरे निगाहों से निहार रहा था. वो खुश था की रोजलीन दुबारा उसे मिल गई. रोजलीन से पहली मुलाक़ात से लेकर उससे जुदाई तक के लम्हों को याद करते-करते उसकी आँख लग गई.

                      अगली सुबह उसकी आँख खुली. उसने दुबारा खुद को अकेला पाया. रोजलीन उसके सामने पेड़ के पास नहीं थी. पेड़ के तने पर कुछ लिखा हुआ था....

“शुक्रिया, मेरी जान बचाने के लिए, पर मुझे माफ़ कर देना इवान्स, मैं परीलोक जा रही हूँ, वापस लौट कर आने के लिए, तुम्हारे लिए नहीं, अपने माता-पिता के लिए, बदले के लिए, एक जंग के लिए, इस पार या उस पार, मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ, लेकिन क्या पता दुबारा मिल पायेंगे या नहीं?”

“रोजलीन”-इवान्स आसमान की तरफ देख चिल्लाया. यह पुकार उसके टूटे दिल की थी. रोजलीन का नाम जंगल के हर एक कोने में गूंज रही थी.

“हैं कोई इस जहां में जो मेरे साथ रहना चाहता हैं, मुझे ऐसे बीच राहोँ में अकेला छोड़कर नहीं जाना चाहता”-इवान्स आसमान की तरह देख चिल्ला रहा था. वो रोना चाहता था पर रो नहीं पा रहा था. उसका दिल मानो सुख चूका था, इसी वजह से आंसू की एक बूँद भी निकलने का नाम नहीं ले रही थी. वो घुटनों के बल जमीन पर गिर पड़ा, उसकी आँखें धीरे-धीरे बंद हो रही थी. वो बेहोश जमीन पर गिरा पड़ा था. उस वीरान जंगल में उसकी सुध लेने वाला कोई नहीं था.

                      दूध से भी सफ़ेद पत्थरों का बना महल. जो रौशनी में जगमगा रहा था. उसकी रौशनी की चकाचौंध इतनी तेज थी कि सूरज को भी बादलों में मुंह छुपाना पड़े. जगह-जगह मोतियों, हीरे-जवाहरातों के ढेर पड़े थे. इत्र की खुशबु हर जगह महक रही थी. जन्नत से कम नहीं थी यह जगह. यह था ‘परीलोक’.

                      पर-परियों की सभा चल रही थी. राजा-रानी अपने सिंहासन पर विराजमान थे. रोजलीन उनके बायीं तरफ पंक्ति में पहले क्रमांक पर बैठी थी. वहां मौजूद सभी पर-परियों की वेशभूषा एक जैसी ही थी दुध सी सफ़ेद, सबके पीठ पे पंख बने थे, रोजलीन के भी.

“आखिर हमें पता चल ही गया कि डायने रहती कहाँ हैं, तो क्या लगता हैं आप सबको कि अब हमें ओर देर करनी चाहिए या नहीं?”-परीलोक का राजा(पर) बोला.

“नहीं”-सब एकसाथ चिल्लाएं. रोजलीन खामोश थी. चेहरा उदास. वो फर्श पर नजरें जमाए कुछ सोच रही थी.

“रोजलीन तुमने जवाब नहीं दिया”-रानी उठकर रोजलीन के पास आई. उसने रोजलीन के कंधे पर हाथ रखा और रोजलीन ने रानी की तरफ उदासी से देखा.

“क्या हुआ तुम्हे?”-रानी ने दुबारा पूछा.

“मुझसे अब और इंतज़ार नहीं होता, मैं जल्द से जल्द अपने माता-पिता की मौत का गम मिटाना चाहती हूँ”-रोजलीन भावुक थी.

“आपका इंतज़ार जल्द ही ख़त्म होंगा”-रानी ने सांत्वना दी.

“तो तैयारी करो बदले की जंग के लिए”-रानी ने आदेश दिया.

सभा ख़त्म हुईं. सब वहां से चले गए सिवाय रोजलीन के. दूसरी तरफ इवान्स अभी भी बेहोश पड़ा था.

                       डफलीन में डायनों की सभा चल रही थी. एक थोड़ी-सी ऊँची जगह पर तीन पत्थरों की कुर्सियां बनी थी. आसीन खड़ीं थी. उसके दायें-बाएँ दो डायने कुर्सी पे बैठी थी. उनके सामने हजारों डायने जो हर उम्र की थी खड़ी थी.

“पिछले दिनों जो कुछ भी घटित हुआ उसके लिए मैं आप सबसे माफ़ी मांगती हूँ, मैं अपने गले की सौगंध खाकर कहती हूँ मुझे इवान्स ने कभी नही बताया कि वो जिस लड़की को पिशाचों के चुंगुल छुडाना था वो एक परी हैं....”-आसीन ने सफाई दी.

“....और वो परी अपने माता-पिता की मौत का बदला पुरे डफलीन राज्य से लेने को आबरू हैं....”

“....लेकिन हमारी मुसीबत यहीं ख़त्म नहीं होती.... एक डायन के बेटे के खातिर हमने सबसे खतरनाक दुश्मनी मोल ले ली हैं, जिससे डफलीन राज्य का खात्मा भी हो सकता हैं....”

“....आने वाला वक़्त डफलीन के लिए मुसीबतों भरा हैं....दुश्मन दो हैं और हम एक....एक तरफ पिशाच तो दूसरी तरफ परियां....लेकिन इतिहास गवाह हैं कि जिसने भी डफलीन की तरफ आँख उठाई, हमनें उस आँख को नोच खाया हैं....”

“....इसलियें अब वक़्त आ गया हैं....हमें अपनी ताकत दिखाने का....अपनी असली शक्तियों का प्रदर्शन करने का....इसके लिए हमें एकजुट होकर लड़ना पड़ेंगा...क्या तुम सब तैयार हो?”-आसीन तेज आवाज में बोली.

“हाँ!”-भीड़ ने एकसाथ कहा.

“क्या तुम सब तैयार हो?”-आसीन दुबारा बोली, दुगने जोश के साथ.

“हाँ!”-भीड़ ने आसीन से भी दुगने जोश से हामी भरी..

“....तो योजना के मुताबिक हमें सबसे पहले एस्कॉर्ट पर हमला करना हैं....वहां 10-15 ही पिशाच मौजूद हैं....जिनसे हम आसनी से निबट सकते हैं....एक बार एस्कॉर्ट हमारे कब्जे में आ गया तो हम आधी लड़ाई जीत चुके होंगे....तो तैयारी करो एस्कॉर्ट पर हमले की....”-आसीन ने उदघोषण किया. जंगल में इवान्स अभी भी बेहोश पड़ा था.

एक कक्ष में किमियन और कुछ पिशाच मशविरा कर रहे थे.

“मुझे किसी भी हालत में इवान्स चाहिए...इवान्स न सही तो उसका दिल ही....जाओ जाकर ढूंढो उसे...”-किमियन ने आदेश दिया और 5-6 पिशाचों की टोली निकल पड़ीं इवान्स की तलाश में. तभी एक पिशाच ने कक्ष में प्रवेश किया. उसने डफलीन की योजना किमियन को सुनाई.

“एस्कॉर्ट पर कब्ज़ा....”-किमियन गुस्से में थी.

“....उनकी इतनी हिम्मत की पहले वो वैम्पर में घुस लड़की भगा ले गए और अब एस्कॉर्ट पर कब्ज़ा...”

“....एक लड़की क्या भगा ले गये, वो हमें कमजोर समझने की भूल कर बैठे....लगता हैं मजा चखाना पड़ेंगा....”

“....क्रिस्टन के पास सन्देश भिजवाओ कि वक़्त हो गया हैं अपने राज्य के सैनिकों को कुर्बानी देने का....लड़ाई की तैयारी करे और हमारा इंतज़ार करे....बहुत जल्द वैम्पर के पिशाच उनके साथ जंग में खड़े होंगे....”-इतना कहते ही एक पिशाच कक्ष से चला गया सन्देश पहुंचाने. किमियन गुस्से में आगबबुला हो रही थी. जंगल में इवान्स अभी भी बेहोश पड़ा था.

“वैम्पर का दूत कोई सन्देश लेकर आया हैं”-एक सेवक ने कक्ष में प्रवेश कर राजा क्रिस्टन को खबर दी. पिशाच ने सन्देश सुनाया और चला गया. क्रिस्टन व नेफ्थन गहन चिंता में थे. फर्क बस इतना था कि क्रिस्टन को स्वयं की चिंता सता रही थी तो नेफ्थन को पुरे एस्कॉर्ट राज्य की. लेकिन अब चिंता करने का कोई फायदा नहीं था. क्रिस्टन ने एक दिन एक डायन से एस्कॉर्ट की रक्षा के लिए मदद मांगी थी, तो अब एक पिशाच से, लेकिन एस्कॉर्ट तो बस नाम था असली रक्षा तो उसे खुद की करवानी थी. एक कायर राजा प्रजा की नजरों में इस कदर गिर चूका था कि शुक्र हैं की राजा कि कोई संतान नहीं थी वरना सात पीढ़ियों तक वो कभी प्रजा की नजरों में उठ नहीं पाती. राज्य में खबर आग की तरह फ़ैल गई थी कि डायने कभी भी एस्कॉर्ट पर हमला कर सकती थी. पिशाचों को पहुँचने में वक्त लगेगा इसलिए उनके आने तक एस्कॉर्ट की सेना को डायनों से लड़ना होंगा जो उनकी ताकत के सामने मच्छर के समान थे. प्रजा में रोष व्याप्त था. सब खौफ के साये में घरो में दुबके बैठे थे. सबको वो ख़ुशी का दिन याद आ रहा था जब क्रिस्टन जंगल से एक बच्चा लेकर आये थे और सब एस्कॉर्ट के देवता का शुक्रिया अदा कर रहे थे कि भविष्यवाणी सच हुईं, उन्हें उनका असली राजा दुबारा मिल गया. लेकिन सारी भविष्वाणी धरी की धरी रह गई. इवान्स अभी भी जंगल में बेहोश पड़ा था.

                     इवान्स को आखिरकार होश आ गया. वो उठ बैठा. उसका सिर चकरा रहा था. आँखें अधखुली थी. उसे यह भी मालुम नहीं था कि उसकी बेहोशी के बाद एस्कॉर्ट खतरे में पड चूका था. वो चारो तरफ देख रहा था. तभी उसे किसी के गुनगुनाते हुए आने की आवाज सूनाई दी. इवान्स खड़ा हुआ. अपनी आँखें पूरी तरह से खोलने की कोशिश कर रहा था लेकिन  खुल नहीं पा रही थी. आवाज दाईं तरफ से आ रही थी. उसने आँख मसलते हुए देखा. उसका दोस्त उसकी ओर आ रहा था ‘एस्कॉर्ट का भूत’....


कहानी अभी बाकी हैं....

अगली कड़ी:- दी एस्कॉर्ट हार्ट -10- (ट्रुथ ऑफ़ इवान्स) 

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