पिछली कड़ी:- दी एस्कॉर्ट हार्ट -6- (विच रिटर्न्स एंड घोस्ट इज बैक)

अगली सुबह जैसे ही उसकी नींद खुली व अचंभित रह गया. उसके सामने एक आकृति मुस्कुराते हुए हवा में तैर रही थी. उसका दोस्त वापस लौट आया था उसके पास....“एस्कॉर्ट का भूत”.
“कैसे हो मेरे दोस्त?”-भुत ने इवांस को देख ख़ुशी प्रकट की.
“भूत!”-इवान्स प्रफुल्लित अपनी जगह से उठा, वो भूत को देखते ही परी, माँ, पिता सबसे जुडी समस्याएं उसके दिलो-दिमाग से छूमंतर हो गई.
“मैंने कहा था ना कि बहुत जल्दी वापस आऊंगा, क्यूंकि मेरे बिना तुम अधूरे हो”
“तुम्हे पता हैं, मेरे साथ क्या हुआ?”-इवान्स फिर से निराशा में डूब चूका था.
“मुझे पता हैं नहीं, मुझे पहले से ही पता था कि यह सब होने वाला हैं”-भूत ने अपना राज खोला.
“तो तुमने मुझे बताया क्यूँ नहीं?”-इवान्स चिल्लाया.
“अगर तुम्हे बता देता, तो भीं तुम कुछ नहीं कर सकते, जो होना हैं वो होकर रहेंगा....”-भूत ने शांत लहज़े से जवाब दिया.
“....और इतने से में तुम हिम्मत हार गए, अभी तो शुरुआत हैं मेरे दोस्त, बहुत कुछ होना बाकी हैं”
“बहुत कुछ क्या?”-इवान्स गुस्से में बोला.
“हर कदम पर तुम्हे अपनों से लड़ना हैं”

“अब और कितने अपनों से लड़ना हैं मुझें?”
“वक़्त आने पर सब पता चल जायेंगा”
“और वो वक़्त कब आयेंगा?”-इवान्स अपना धैर्य खोने लगा था.

“बहुत जल्द आयेंगा मेरे दोस्त, अब मैं जैसा कहूँ बस वैसा करो”
“अब और क्या करवाना चाहते हो तुम मुझसे?....तुमने ही कहा था ना मुझे कि जंगल जाकर लड़की से प्यार का इजहार करो, कर दिया इजहार और अब, कुछ नहीं हैं मेरे पास, सब-कुछ खो चूका हूँ और इस वीरान जंगल में पेड़ के नीचे बैठे....”-इवान्स ने पेड़ पर जोर-से घूंसा मारा और फिर अपना सिर उस पर रख दिया.
“ऐसे निराश मत हो मेरे दोस्त”-भूत भी इवान्स को परेशान देख परेशान होने लगा था.
“फिलहाल मेरा सिर्फ एक ही मकसद हैं रोजलीन को पिशाचों के बंधन से छुडाना, पर कैसे?”-इवान्स ने भूत की तरफ देखा.
“डफलीन!”-भूत ने पहली राह बताई.
“मैं उस डायन के पास कभी नहीं जाऊँगा”-इवान्स की आवाज में नफरत घुली हुयी थी.
“वो तुम्हारी माँ हैं”-भूत ने कड़क आवाज में कहा.
“मैं उसे अपनी माँ नहीं मानता”
“तुम्हारे मानने या न मानने से क्या होता हैं, तुमने उसी की कोख से जन्म लिया हैं और अगर तुम्हे अपने प्यार को वापस लाना हैं तो डफलीन मदद मांगने जाना होंगा, अलविदा, फिर मिलेंगे!”-और भूत ने चुटकी बजाई और टूटते सितारों के बीच गायब हो गया. इवान्स चारों तरफ देखने लगा और पेड़ के सहारे बैठ गया, एक गहरी उलझन भरी सोच में.
                   अपनें हाथों के पीठ पीछे एक-दुसरे से बांधे राजा क्रिस्टन अपने कक्ष में घूम रहे थे. उनके क़दमों की तेज आहट आराम से सुनाई पड रही थी. चेहरे पर गंभीर परेशानी के भाव थे. आँखों बेजान दिख रही थी. सेनापति नेफ्थन कक्ष में प्रवेश करता हैं.
“सेनापति नेफ्थन आपकी सेवा में हाजिर हैं”-नेफ्थन ने सिर झुका के सम्मान व्यक्त किया.
“हम वैम्पर जा रहे हैं, जाने की तैयारी करो”
“यह आप क्या कह रहे हैं, एक बार फिर सोच लो”
“मैंने सोच लिया हैं, डायनों से अपने राज्य को महफूज रखने के लिए हमें पिशाचों से हाथ मिलाना होंगा किसी भी क़ीमत पर”
“पिशाचों से हाथ मिलाने से पहले क्यूँ न हम डफलीन जाकर डायनों से बातचीत करे”
“बातचीत करने का वक़्त बीत चूका हैं, मैं अपने फैसले पर अडिग हूँ”-राजा के इतना कहते ही नेफ्थन वहां से चला गया.
                    सूरज डूब चूका था, अँधेरा होने वाला था. एक नदी की किनारें बहुत से मशालों की रोशनी चमक रही थी. बहुत से कच्चे मकान थे. चारो तरफ सन्नाटा पसरा हुआ था. मकानों को चारो ओर लकड़ी की बाड़ से घेराबंदी की हुईं थी. उसका प्रवेश द्वार जो लकड़ी का बना था, उसके बीचोंबीच खोपड़ी लटक रही थी. उस दरवाजें के भीतर बसा था डायनों का राज्य ‘डफलीन’.
                    द्वार के पास एक मोटी बदसूरत-सी औरत बड़े-से पत्थर पर बैठी थी. उसका मुंह व दांत खून से सने थे. उसके गठीले हाथ में दो-चार जिन्दा चूहे दबे थे. तभी उसे किसी की आने की आहट सुनाई दी. उसने जहाँ तक अपनी नजरें दौड़ा सकती थी दौड़ाई. कोई परछाई अंधेरे से बाहर आते हुए दिखाई दी. वो परछाई इवान्स की थी. अपने सफ़ेद घोड़े की लगाम पकड़ें वो पैदल उसकी तरफ आ रहा था. मोटी बदसूरत औरत ने इवान्स को देखते ही द्वार के भीतर भागी....आसीन का नाम पुकारते हुए.
                     उसके पुकारने की आवाज सुन सभी डायने अपने-अपने घरों से बाहर निकली. इवान्स प्रवेश-द्वार से प्रवेश कर चूका था. उसने घोडा द्वार के पास उस बड़े-से पत्थर से बाँध दिया था. सब डायने एकटक इवान्स को देख रही थी और इवान्स बारी-बारी से सब पर नजरें डाल रहा था. इवान्स के चेहरे पर मतलबी भाव थे कि वो अपने मतलब के खातिर डफलीन आया हैं. सामने से उसे अपनी माँ आते हुए दिखाई दी. वो हर्षित-सी इवान्स की तरफ भागते हुए आ रही थी. इवान्स रुक गया और माँ अपने बेटे से लिपट गई, पर इवान्स स्थिर खड़ा रहा, उसने अपनी बांहें नही फैलाई. आसीन की आँखों से ममता बहने लगी थी. आस-पास मौजूद सभी डायनों की आँखें तर हो चुकी थी. इवान्स असहज महसुस कर रहा था.
“मुझे यकीन था कि मेरा बेटा मेरे पास वापस जरुर आयेंगा”-वो रूहांसे स्वर में बोली. इवान्स ने  कोई जवाब नहीं दिया.
                     आसीन के घर के बाहर एक बड़े पत्थर पर इवान्स बैठा था.आसीन उसके लिए थाली भर स्वादिष्ट पकवान लेकर आई. सभी डायने वहां आस-पास मौजूद थी. आसीन ने एक निवाला अपने के बेटे के मुंह के पास ले गई. इवान्स असहज अपनी माँ की आँखों को घुर रहा था. आसीन बेहद खुश थी, उसकी आँखों के दीये बता रहे थे कि आज से पहले वो इतनी ज्यादा खुश कभी नही हुई थी. इवान्स ने अपना मुंह खोला, अपनी माँ के हाथों से एक निवाला खाया. आसीन की आँखें ख़ुशी के मारे दुबारा भीग गई.
“मुझे तुम सबकी मदद चाहिए”-निवाला गले से नीचे उतरते ही इवान्स ने अपनी मंशा जाहिर की.
“कैसी मदद?”-आसीन के पूछने से पहले ही एक डायन बीच में बोल पड़ी.
“मुझे वैम्पर से एक लड़की रोजलीन को छुडाना हैं जिससे मैं बहुत ज्यादा प्यार करता हूँ, क्या आप सब मेरी मदद करोंगे?”-इवान्स ने सबके चेहरों पर नजर डाली.
“यह नामुमकिन हैं”-दूसरी डायन बोली.
“हम किसी लड़की को वापस लाने के लिए पिशाचों से दुश्मनी मोल नहीं ले सकते”
                      इवान्स ने अपनी माँ की तरफ देखा. उसकी आँखें जाहिर कर रही थी कि वो बेटे के समर्थन में थी.
“उस लड़की के खातिर न सही लेकिन इवान्स के लिए”-आसीन ने गुजारिश की.
“क्या किसी को मंजूर हैं पिशाचों से लड़ाई”-एक डायन ने सभी डायनों से पूछा. सबने एक साथ ना में गर्दन हिलाई.
“लेकिन इवान्स भी तो डफलीन की ही एक डायन का खून हैं”-आसीन मनाने की कोशिश कर रही थी.
“आसीन तुझे अच्छी तरह मालुम हैं कि डफलीन डायनों का राज्य हैं, इसका किसी भी मर्द से कोई वास्ता नहीं हैं, हम इंसानों से सम्बन्ध बना बच्चे पैदा करते हैं, अगर लड़की पैदा होती हैं तो हम उसे डफलीन में रख लेते हैं और लड़का पैदा हुआ तो हम उन्हें जंगल में छोड़ आते हैं, आगे उसकी किस्मत, पर वो कभी लौटकर नहीं आये, इवान्स पहला ऐसा बच्चा हैं जो डफलीन लौटकर आया हैं, इसका मतलब यह नहीं कि हम तुम्हारे बेटे के खातिर सभी डायनों की जान जोखिम में डालें”-इवान्स खामोश सारी बातें सुन रहा था. आसीन के पास जवाबी शब्द नहीं थे. सभी डायने अपने-अपने घरों को लौट गई. आसीन अफ़सोस भरी निगाहों से इवान्स चेहरा घुर रहीं थी.
“तुम सब कितनी निर्दयी हो, लड़कियों को अपने जैसी निर्दयी बनाने के लिए अपने पास रख लेती हो और लड़कों को जंगली जानवारो के हवाले कर देती हो” इवान्स गुस्से में बोला.
“मैं तुम्हे हमेशा अपने पास रखना चाहती थी, लेकिन तुम्हारे पिता ने मुझे जिंदा दीवार में चुनवा दिया तब डफलीन के पास कोई और चारा न था तुम्हे जंगल में छोड़ने के अलावा”-आसीन, इवान्स के दिल में उनके प्रति नफरत कम करने की कोशिश कर रही थी.
“तुम इतने सालों से उस दीवार में कैद थी फिर कोई डायन तुम्हारी मदद को क्यूँ नहीं आई?”-इवान्स ने सवाल किया.
“मुझे दीवार में चुनवाने से पहले तुम्हारे पिता ने तांत्रिक की मदद से एस्कॉर्ट के चारो तरफ जादू करवा दिया था कि अगर कोई भी डायन इसके करीब आने कि कोशिश करेंगी तो जलकर भस्म हो जायेंगी, मैंने उस दिन दीवार से बाहर आते ही सबसे पहले उस जादू के असर को खत्म किया....”
“....और तुम्हे याद हैं वो जादूगरनी डायन आलिना....”
“आलिना!”-इवान्स तपाक से बोला.
“हाँ, वो भी तुम्हारे करीब इसलिए ही आई थी ताकि तुम्हारे साथ रहकर उस जादू को खत्म कर सके पर उसे तुझसे प्यार हो गया और उसने खुद को जलाकर भस्म कर दिया”-आसीन ने आलिना का राज बताया.
“तुम्हे कैसे पता कि राजा मुझे महल में लेकर आया हैं और उस दिन डायनों को कैसे पता चला कि तुम दीवार से बाहर आ गई हो?”-इवान्स अपने जेहन में छुपे हर सवाल का जवाब जानना चाहता था.
आसीन मुस्कुराई और उसने अपनी उंगुलियों को मुंह से सटा सीटी बजाई. एक उल्लू उड़ता हुआ आकर आसीन के कंधे पर बैठा. इवान्स चौंका.
“इसको तो मैंने कहीं बार महल में आधी रात को देखा था और यह उस दिन भी खिड़की में बैठा था जिस दिन तुम दीवार से बाहर आई थी”-इवान्स चकित-सा बोला.
“यह मेरा जासूस हैं जो हर वक़्त मुझे खबरें पहुंचाया करता हैं, हम दोनों ही आपस में एक-दुसरे की बातें समझ सकते हैं, बताओ क्या खबर लायें हो?”-आसीन और उल्लू ने एक-दुसरे की आँखों में देखा. इवान्स घोर से उनपे नजरें जमाये था. कुछ देर बाद आसीन ने इवान्स की तरफ देखा.
“क्या कहा उसने?”-इवान्स ने पूछा.
“राजा क्रिस्टन ने एस्कॉर्ट वैम्पर के हवाले कर दिया हैं, बदले में उसने डायनों से अपनी रक्षा की मदद मांगी हैं”
“क्या?”-इवान्स को विश्वास नही हो रहा था कि उसका पिता इतना स्वार्थी हो सकता हैं.
                     एक बहुत बड़ा महल. लगभग हजारों एकड़ में फैला विशालकाय महल, जिसमें रहते हैं हजारों पिशाच और वो ही विशालकाय महल जाना जाता हैं पिशाचों के ‘वैम्पर’ राज्य के नाम से.


कहानी अभी बाकी हैं....


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