पिछली कड़ी:- दी एस्कॉर्ट हार्ट -5- (दी सीक्रेट)

“क्या इवान्स आपका बेटा हैं?”

“नहीं, वो तो मुझे जंगल में मिला था, यह बात इवान्स को नहीं पता हैं, लेकिन इसमें राज क्या हैं?”

“इवान्स तुम्हारा ही बेटा हैं, लेकिन रानी एंगेलिका का नहीं”

                      आधी रात होने वाली थी. इवान्स व रोजलीन एक-दुसरे की बाहों में हाथ डाले रात की शान्ति में सो रहे महल में घूम रहे थे. रोजलीन ने अपना सिर इवान्स के कंधे पर रख रखा था. आँखें अधखुली थी. हर रात की भांति इस रात को भी इवान्स को इंतज़ार था उस आवाज का, लेकिन आज कोई आवाज उसके कानों में दस्तक नहीं दे रही थी. काफी वक़्त बीत चूका था दोनों को घूमते-घूमते. आवाज न सुनाई देने की वजह से इवान्स को ख़ुशी होने की बजाय वो बैचैन होने लगा था. उसके कदम अनायास ही रुक गए. उसे एक अजीब बैचैनी महसूस हो रही थी. उसके थोडा आगे सामने खिड़की में हर रात को दिखने वाला उल्लू बैठा था. रोजलीन ने इवान्स के गाल पे एक चुम्बन दिया. लेकिन इससे इवान्स के हाव-भाव में कोई परिवर्तन नहीं आया, वो अभी भी बैचैन दिख रहा था. वो इधर-उधर अपनी नजरें दौड़ा रहा था, मानों कोई चीज़ उसे अपनी तरफ खींच रही हो. फिर रोजलीन ने उसके गर्दन पर एक चुम्बन दिया. फिर उसके गर्दन के होते उसके दिल पर.

                      और अगले ही पल रोजलीन ने अपना मुंह खोला, दो बड़े नुकीले दांत
दिखाई दे रहे थे और उसने इवान्स के दिल के हिस्से को खाने की कोशिश की ही थी कि, हल्का-सा काटते ही इवान्स ने उसे धक्का दे फर्श पर गिरा दिया. इवान्स चकित-सा रोजलीन की तरफ देख रहा था. रोजलीन के होंठो पे हल्का-सा खून लगा था, उसकी आँखों में खून सवार था.

“क्या कर रही हो तुम?”-इवान्स के सीने से खून बहने लगा था.

“मुझे तुम्हारा दिल खाना हैं और अमर होना हैं”-रोजलीन की आवाज खौफनाक लग रही थी.

“मैं समझ सकता हूँ कि तुम अब एक परी नहीं हो, पिशाच बन चुकी हो, लेकिन अपनी भावनाओं पर काबू रखो”-इवान्स के बात खत्म करते ही रोजलीन हँसते हुए अपनी जगह से उठी.         

“क्या हुआ हँस क्यूँ रही हो?”

“मैं तुम्हारी परी रोजलीन नहीं हूँ....”-और जोर से हँसने लगी.

“क्या कह रही हो तुम?”-इवान्स ने दबी से आवाज से पूछा.

“तुम्हारा प्यार, परी रोजलीन मेरे कब्जे में हैं, पिशाचों के राज्य वैम्पर में और मैं हूँ वैम्पर की मल्लिका किमियन”-इतना कहते ही वो अपने असली रूप में आ गई. यह वो ही औरत-पिशाच थी जो उस दिन तीनो पुरुष-पिशाचो के संग रोजलीन का खून पीने आई थी. काली आँखें. कान तक छोटे-छोटे बाल. चमकीला गाउन पहने, पीछे फर्श को छूता चोगा.

“रोजलीन तुम्हारे कब्जे में हैं”-इवान्स को अभी भी किमियन की बात पे विश्वास नहीं हो रहा था.

“हाँ, हमनें सोचा कि परी का खून पीने से चांदी वरदान बन जायेंगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ, पता हैं क्यूँ....?”

इवान्स ने कोई जवाब नहीं दिया.

“....क्यूंकि उसका दिल तुम्हारे सीने में हैं और अब मुझे वो दिल खाना हैं”-किमियन ने अपना मुंह खोला. दो नुकीले बड़े दांत दिख रहे थे.

इवान्स की शक्ल को मानो सांप सूंघ गया हो. उसी पल राजा क्रिस्टन भी वहां पहुँच गए, सिपाहियों के साथ. इवान्स कुछ बोले उससे पहले....

सिपाहियों गिरफ्तार कर दो इवान्स को”-अपने राजा का आदेश सुनते ही सिपाही इवान्स की तरफ बढे और इवान्स अपने पिता का चेहरा ही देखता रह गया.

“नहीं, इसे मैं ही मारूंगी, मुझे इसका दिल खाना हैं”-किमियन के इतना कहते ही सिपाही रुक गए.

                          इससे पहले इवान्स कुछ सोच पाता, कुछ कह पाता, कुछ पूछ पाता, किमियन ने हवा में रफ़्तार से उड़ते हुए इवान्स पर प्रहार किया, इवान्स नीचे झुक गया और किमियन उसके पीछे दीवार से जा टकराई. टक्कर इतनी तेज थी कि दीवार हिलने लगी. किमियन उठकर एक तरफ आ गई. वहां मौजूद सभी लोगों की नजर उस हिलती दीवार पर जम गई और कुछ ही पल बाद दीवार धाराशायी हो गई. मलबे की धुल हवा में चारो तरफ फ़ैल गई थी. अभी भी सबकी नजरें वहीँ जमी हुई थी, तभी उस में से कोई बाहर आता हुआ दिखाई दिया. वह एक अधेड़ औरत थी. गोल मुरझाई सी आँखें, सफ़ेद बाल, चेहरे पे झुर्रिया, हाथो की नसें बाहर झलक रही थी.

“आसीन”-राजा क्रिस्टन के मुँह से अनायास ही निकल पड़ा.

इवान्स और किमियन, क्रिस्टन का चेहरा ताकने लगे.

“हाँ, मैं आसीन, जिसने बरसो पहले तुम्हारे राज्य को शक्तिशाली सोबरीन से बचाया था, लेकिन साथ ही एक भूल कर दी, तुमसे प्यार करने की भूल, जिसकी मुझे यह सजा मिली की तुमने मुझे जिंदा दीवार चुनवा दिया”-राजा ने उसकी बात कोई जवाब नहीं दिया, उसका डर के मारे बुरा हाल होने लगा. आसीन ने इवान्स की तरफ देखा.

“क्या हर रोज आधी रात को आप मुझे पुकारती थी”-इवान्स ने पूछा.

“हाँ”-आसीन, इवान्स के करीब बढ़ने लगी.

“क्यूँ?”-इवान्स पीछे हटने लगा था.

“क्या क्रिस्टन ने तुम्हे सच नहीं बताया”-आसीन ने क्रिस्टन की तरफ देखा.
“कैसा सच”-इवान्स ने पीछे हटते अपने पिता की तरफ देखा.

“खून के रिश्ते का सच”

“खून का रिश्ता”-इवान्स चौंका.

“तुम मेरे और क्रिस्टन के बेटे को, मैंने तुम्हे डफलीन में डायनों के पास यह कहकर छोड़ आई थी कि अगर मेरे साथ कुछ गलत हो जाए, तो वो तुम्हे जंगल में छोड़कर आ जाए”-इवान्स रुक गया.

“मुझे तुम आज वापस मिल गए”-और आसीन के आँखों से आंसू टपकने लगे.

“नहीं, यह सच नहीं हो सकता”

“यही सच हैं मेरे बेटे”

“नहीं, यह सच नहीं हो सकता, मैं एक डायन का बेटा नहीं हो सकता”

“तुम मुझे जंगल में ही मिले थे, लेकिन मुझे उस वक़्त नहीं पता था कि तुम मेरी नाजायज औलाद हो, वो तो मुझे आज कीमियन ने बताया”-राजा क्रिस्टन ने अपनी चुप्पी तोड़ी.

                     इवान्स को विश्वास नहीं हो रहा था, वो उदास अपने घुटने पर बैठ गया. आसीन ने उसके करीब जाकर उसको संभालने की कोशिश की, लेकिन उसने आसीन को अपने से दूर कर दिया. वहीँ दूसरी तरफ किमियन अपने दुसरे प्रहार के तैयारी में ही थी कि अचानक किसी भीड़ के आने की आवाज सुनाई दी. डफलीन राज्य की बहुत सी डायने वहां आती हुयी दिखाई दी. किमियन ने वहां से खिसकने में ही अपनी भलाई समझी और वहां से भाग गई. उसे किसी ने भी नहीं देखा. राजा और सिपाही दीवार के सटके खड़े थे. राजा के चेहरे का रंग उड़ चूका था, वो भयभीत नजर आ रहा था. सभी डायनों ने झुककर आसीन को अभिवादन किया.

“पूरा डफलीन राज्य आपका बेसब्री से इंतज़ार कर रहा हैं”-एक डायन ने कहा.

“वो पिशाच कहाँ गई?”-किमियन को वहां न पाकर आसीन बोली.

“लगता हैं हमको आते देख भाग गई”-एक डायन ने कहा.

“अभी तो मैं जा रही हूँ लेकिन दुबारा वापस जरुर आउंगी, तुमसे बदला लेना आभी बाकी हैं”- आसीन ने क्रिस्टन को चेतावनी दी.

क्रिस्टन और ज्यादा भयभीत नजर आ रहा था. डर के मारे उसकी आवाज ही नहीं निकल रही थी.

“इवान्स बेटे तुम्हे भी हमारे साथ चलना हैं, तुम्हारा यहाँ रुकना अब खतरे से खाली नहीं हैं, क्यूंकि अब तुम्हारा पिता ही तुम्हारा सबसे बड़ा दुश्मन बन गया हैं और पिशाच कभी भी वापस आ सकती हैं”

आसीन और सभी डायने वहां से जाने लगी.

“मैं नहीं आ रहा हूँ तुम्हारे साथ”-इवान्स गुस्से में बोला, वो अभी भी घुटनों के बल ही बैठा हुआ था. सभी डायने रुक गई.

“क्या तुम अपनी माँ के साथ रहना पसंद नहीं करोंगे”-आसीन ने अपनी इच्छा जाहिर की.

“तुम मेरी माँ नहीं हो, एक डायन मेरी माँ कभी नहीं हो सकती, तुम चली जाओ यहाँ से”-काफी मनाने के बाद भी इवान्स चलने को तैयार नहीं हुआ. सभी डायने डफलीन रवाना हो गई.

इवान्स उठा और क्रिस्टन के समीप गया.

“क्यूँ किया आपने ऐसा हमारे साथ?”-उसकीं आवाज में अजीब-सा दर्द था.

“उस वक़्त जो सही था वो मैंने किया”-राजा का डर कम हो चूका था.

“क्या सही किया आपने, एक डायन को माँ बनाकर जिंदा दीवार में चुनवा दिया, फिर उसी के बच्चे को गोद ले लिया”-इवान्स चिल्लाया.

“उसने मुझे कभी नहीं बताया था की उसने एक बेटे को जन्म दिया हैं वरना....”

“वरना क्या?”-इवान्स फिर से चिल्लाया.

“वरना मैं उसका सिर कलम कर देता”-इतना कहते ही राजा ने म्यान में से तलवार खिंची.

इवान्स एक कदम पीछे खिसका.

“उस वक़्त नहीं कर पाया, लेकिन अब तो कर ही सकता हूँ”-क्रिस्टन ने इवान्स पे वार किये, लेकिन उसका हर वार खाली गया. सिपाहियों ने भी इवान्स पर हमला करना शुरू कर दिया था.

“मैं अपने पिता से लड़ाई कतई नहीं करना चाहता”-इवान्स की आवाज में अपनत्व था.

“अपनी गन्दी जुबान से मुझे पिता मत कहो”-क्रिस्टन व सिपाहियों के वार जारी थे, लेकिन इवान्स बच पाने में कामयाब हो रहा था.  

“आप मेरे पिता थे, हैं और हमेशा रहेंगे”-इवान्स एक सिपाही को लात मार उससे तलवार छिनी और अगले ही पल वो सिपाहियों पर टूट पड़ा और सबको मौत के घाट उतार दिया. फर्श पर खून ही खून फैलने लगा था. अगले ही पल उसके एक तेज वार से क्रिस्टन फर्श पर गिर गया. उसकी तलवार दूर जा गिरी. इवान्स उसके सामने उसके गर्दन पे तलवार लगा खड़ा था. राजा क्रिस्टन पसीने में तर हो चूका था.

“आपका बहुत-बहुत शुक्रिया कि आपने मुझे तलवारबाजी सिखाई, जो आज बखूबी काम आई, लेकिन मैं इतना भी निर्दयी नहीं हूँ कि अपने हाथो अपने पिता का कत्ल करूं”-इतना कहते ही इवान्स वहां से चला गया. राजा उसको जाते देख रहे था. उसके जाते ही वहां एंगेलिका और नेफ्थन पहुँचे. राजा ने उनको सारी बताई थी. अगले दिन पुरे एस्कॉर्ट में यह बात फैल चुकी थी कि इवान्स राजा की नाजायज औलाद हैं इसलिए राजा ने उसे एस्कॉर्ट से निकाल दिया. इवान्स के चले जाने के बाद कुछ लोगो का भ्रम टूट गया कि भविष्वाणी सच हुयी हैं, लेकिन कोई अभी भी भविष्यवाणी सच मान रहे थे.

                       इवान्स राज्य से बाहर जंगल में एक पेड़ के नीचे बैठा आसमान की तरफ देख रहा था. पास में उसका सफ़ेद घोडा बंधा था. उसे अभी भी विश्वास नहीं हो रहा था कि वो एक डायन का बेटा हैं. साथ ही उसे अपने प्यार रोजलीन की चिंता सता रही थी, जो वैम्पर राज्य में वैम्पायरो के कब्जे में थी. उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वो कैसे वहां तक पहुंचे और उसे छुडाये. यह सोचते-सोचते उसकी आँख लग गई.

                        अगली सुबह जैसे ही उसकी नींद खुली व अचंभित रह गया. उसके सामने एक आकृति मुस्कुराते हुए हवा में तैर रही थी. उसका दोस्त वापस लौट आया था उसके पास....“एस्कॉर्ट का भूत”.


कहानी अभी बाकी हैं....


अगली कड़ी:- दी एस्कॉर्ट हार्ट -7- (सन मीट्स मदर)


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