बरसो पुरानी बात हैं सरफरा नाम की एक घुमक्कड़ जाती हुआ करती थी, बिना वजूद के 200 लोगो का समूह जंगल दर जंगल भटकता रहता था. उनका सरदार था ‘उर्वियश’. एक बार किसी जंगल में फैली महामारी ने सरफरा समूह के आधे से ज्यादा लोगों को अपनी चपेट में ले लिया. हताश-निराश उर्वियश को एहसास हुआ की उनका कोई वजूद नहीं हैं और वजूद की तलाश में अपने बाकी बचे काफिले को जंगल में अकेला छोड़ ‘कास्टरिका’ पहुँचा. कास्टरिका के राजा ‘जेसपन’ व प्रजा के बीच का अटूट प्रेम हर राजा व उस राजा की प्रजा के लिए एक मिसाल था.  उर्वियश ने राजा ‘जेसपन’ से भेंट की, उसके अलग बेबाक अंदाज़ से खुश होकर राजा ने उसे राजमहल में काम पर रख दिया. महल में काम के साथ-साथ उर्वियश ने अपने काफिले का पूरा ध्यान रखा, जरूरत के हिसाब से उन्हें खाना-कपड़े पहुँचाता रहता था. धीरे-धीरे काफी वक़्त बीतता गया और एक दिन उर्वियश की वफादारी-बहादुरी से खुश होकर राजा जेसपन ने उसे कास्टरिका की सेना का सेनापति नियुक्त कर दिया. राजा जेसपन की ज़िन्दगी की यह सबसे बड़ी गलती थी. एक रात मौका पाकर उर्वियश ने जेसपन को मौत के घाट उतार दिया. कहा जाता हैं राजा की हत्या के बाद प्रजा इतनी रोयी की कास्टरिका के जंगल के मुहाने पे जो नदी बहती हैं वो उस प्रजा के आंसुओ से बनी थी. जेसपन की हत्या के बाद उर्वियश ने सरफरा जाति को वजूद दिलाया और उर्वियश बन गया कास्टरिका का नया राजा, लेकिन प्रजा ने कसम खा ली कि जेसपन के बाद किसी को भी अपना राजा स्वीकार नहीं करेंगी. उर्वियश ने रानी ‘पोलानी’ से जबरदस्ती ब्याह रचाया और जिससे उसके तीन बेटे हुए- ‘एगवर’, ‘गोटान’ और ‘क्रिस्टन’. राजा उर्वियश ने अपने पडौसी राज्य ‘रोजर्ग’ और ‘क्रासी’ के राजाओं को युद्ध में हरा उन पर कब्ज़ा कर दिया और तीनो राज्यों का एकलौता राजा बना.


       दुनिया को अलविदा कहने से पहले उर्वियश ने अपने राज्य अपने तीनो बेटों में बाँट दिए. सबसे बड़े बेटे एगवर को राजर्ग का राजा बना दिया, गोटान को क्रासी का और छोटे बेटे क्रिस्टन को कास्टरिका का. तीनो भाइयों में बिल्कुल भी नहीं बनती थी, सब एक-दुसरे की जान के दुश्मन बने
हुए थे. इसका फायदा ‘डामिन’ राज्य के शक्तिशाली राजा ‘सोबरीन’ ने उठाया, उसने सबसे पहले एगवर को मार राजर्ग पर कब्ज़ा किया, फिर गोटान को मार क्रासी पर, अगला निशाना क्रिस्टन था. मौत के डर से घबराया क्रिस्टन अपने राज्य कास्टरिका को मुसीबत में अकेला छोड़ जंगल में जा छिपा, जहाँ उसकी मुलाकात जादूगरनी डायन ‘आसीन’ से हुई, उसने क्रिस्टन की मदद की और अपनी जादुई शक्तियों का इस्तेमाल कर सोबरीन और उसकी सेना को परलोक पहुँचा कास्टरिका को महफूज़ रखा. इस जश्न के अवसर पर  क्रिस्टन ने कास्टरिका का नाम बदल कर रखा ‘एस्कॉर्ट’.

       वक़्त की नजाकत में पता ही नहीं चला की कब क्रिस्टन और आसीन एक-दुसरे के प्यार में पड गए. मोहब्बत परवान चढ़ी और एक दिन आसीन ने क्रिस्टन के सामने शादी का प्रस्ताव रखा, जिसे शादीशुदा क्रिस्टन ने ठुकरा दिया क्यूंकि उसे डर था की कहीं वो राज्य हडपना तो नहीं चाहती. जादूगरनी डायनों के राज्य ‘डफलीन’ की सभी डायनों की एक कमजोरी थी की वे जिस इंसान से प्यार कर लेती, उनके अंतर्मन से जुड़ जाती उन पर अपना जादू इस्तेमाल नहीं कर सकती थी. आसीन बेबस, लाचार क्रिस्टन के पैरो में गिडगिडा रही थी की क्रिस्टन उसके साथ बेवफाई न करे, लेकिन क्रिस्टन के दिल में रहम न आई और उसने आसीन को जिंदा दीवार में चुनवा दिया.

        एक दिन क्रिस्टन जंगल में सैर के लिए निकला तो उसे जंगल में एक 10 महीने का बच्चा मिला. क्रिस्टन नि:संतान था तो उस बच्चे को गोद ले लिया और वो ही बच्चा बड़ा होकर बना एस्कॉर्ट का राजकुमार ‘इवान्स’.

             पुरे दिन शिकार खेलने के बाद राजा क्रिस्टन एक पेड़ के नीचे विश्राम कर रहे थे. अधेड़ उम्र बाल-दाढ़ी आधे सफ़ेद व आधी काली, साँवले चमकते चेहरे पर हल्की-हल्की झुर्रिया चौड़े आसमान रूपी चेहरे कडकती बिजली जैसे लग रही थी, कद सामान्य, छोटी आँखें पर लाल, चौडा सीना. उनका सफ़ेद घोडा पास ही के एक पेड़ से बंधा था, बाकी सिपाहियों के पांच काले घोड़े सामने पेड़ो से. सब अपने-अपने घोड़ों के पास खड़े राजा के प्रति सम्मान व्यक्त कर रहे थे. एक सिपाही ने अपने घोड़े पर लंधी पोटली में से कुछ फल निकाल राजा के समक्ष प्रस्तुत किये. राजा के पास एस्कॉर्ट का सेनापति नेफ्थन बैठा था, लम्बा कद, पतला लम्बा चेहरा, तीखी नाक, गर्दन तक लम्बे बाल....

“थकान के बाद फल खाने का आनंद दुगुना हो जाता हैं” फल को अपने होंठो से लगाए राजा क्रिस्टन ने सेनापति नेफ्थन से कहा.

             नेफ्थन ने कुछ जवाब नहीं दिया, वह सामने पेड़ पर झगडती गिलहरियों पर नजरे जमाये था, पर ध्यान कहीं और बसेरा किये था. चेहरे पर गहरी खामोशी थी.

“सेनापति नेफ्थन”-राजा ने दुबारा पुकारा, लेकिन इस बार भी नेफ्थन का ध्यान भंग नहीं हुआ.

“नेफ्थन”-राजा ने उसके कंधे को जोर से हिलाते हुए कहा.

नेफ्थन ने चौंकते हुए राजा की तरफ देखा, लेकिन गहरी खामोशी ने दुबारा उसके चेहरे पे छाप छोड़ दी.

“तुम ठीक तो हो ना?”

मैं तो ठीक ही हूँ, लेकिन....”

“लेकिन क्या?”

“....लेकिन आने वाला वक़्त मुझे ठीक नहीं लग रहा हैं”

“क्यूँ क्या हो गया आने वाले वक़्त को?”

“मेरे दिल के एक कोने में एक चिंता उत्पन्न होकर होंठो तक आ रही हैं, पर मैं असमंजस में हूँ की उसे आपसे कैसे व्यक्त करूँ?”

“तुम एस्कॉर्ट राज्य की सेना के सेनापति हो, तुम्हे अपने विचार व्यक्त करने की पूरी आजादी हैं, इस तरह की असमंजस की स्तिथि एक सेनापति के व्यक्तित्व के खिलाफ हैं”

“लेकिन अगर मेरे विचार आपके राज से जुड़े हो तो?”

“तुम एस्कॉर्ट सेना के सेनापति ही नहीं मेरे वफादार साथी भी हो, तुमने हर काम बखूबी अंजाम दिया हैं और हर पल एस्कॉर्ट के भले की बात सोची हैं, शायद तुम्हारे होंठो से लौटने वाले विचार भी जरुर एस्कॉर्ट की भलाई के खातिर ही होंगे, कहो क्या बात हैं?”

नेफ्थन ने गहरी सांस ली.

“आपको भी पता हैं, मुझे भी और पुरे एस्कॉर्ट राज्य को कि एस्कॉर्ट की प्रजा आपको एक राजा के रूप कतई पसंद नहीं करती, उनका आपके प्रति सम्मान ऐसा हैं मानो वो आपकी गुलामी की जंजीरों में जकड़े हो....”

राजा उसकी यह बात सुन जरा भी विचलित नहीं हुए, वो ध्यान लगाये उसकी बात सुन रहे थे.

“....आप तो आज हैं कल नहीं, फिर एस्कॉर्ट का भविष्य किसके हाथों में होंगा? आप निसंतान हो, बिना उत्तराधिकारी के एस्कॉर्ट की बागडौर कौन संभालेंगा? आपके जाने के बाद कहीं ऐसा न हो की एस्कॉर्ट की प्रजा गद्दी के खातिर एक-दुसरे का गला काटने पर उतारू हो जाए या फिर कोई पडौसी राज्य का राजा उसे गुलाम बना ले”

               राजा कुछ असहज महसूस करने लगे थे, उनके पास नेफ्थन के सवालों का कोई जवाब नहीं था. निसंतान होने की बात सोचकर मानो उनका दिल अंदर ही सिकुड़ रहा था. अगले ही पल राजा थोडा सहज महसूस करने लगे थे, कुछ कहना चाहते थे की आसमान में जोर से बिजली कडकी. सबने आसमान की तरफ देखा और अचंभित हो गए. आसमान पूरा खुला और स्वच्छ था, बादल का नामोनिशान दूर-दूर तक नहीं था फिर बिजली कैसे कडकी? दो हाथों के टकराए बिना तो ताली भी नहीं बजती फिर बिना बादलो के बिजली?

                तभी किसी बच्चे के रोने की आवाज सुनाई पड़ी. राजा और सेनापति अपनी जगह से उठे, चारो तरफ निगाहें दौडाने लगे. आवाज तेज-कम हो रही थी. कान चौक्कने होकर आवाज की राह का पता लगा रहे थे.

“पता लगाओ यह आवाज कहाँ से आ रही हैं?”-राजा का आदेश सुनते ही सेनापति और सिपाही चारो दिशाओं में फ़ैल गए. बच्चे रोने की आवाज लगातार आ रही थी. राज खुद को रोक नहीं सका और सेनापति नेफ्थन के पीछे चल पड़ा.
                                   जंगल के बीचोंबीच बनी पगडण्डी पर कपड़ो से बुनी पोटली में 10 महीने का बच्चा अपने नाजुक से हाथ-पैर हिलाते रो रहा था. उसकी चमकदार आँखें आंसुओं में भीग और चमकदार लग रही थी. तभी उसके ऊपर कुछ दुरी पर पर कोई सितारा टूटकर बिखरा हो जैसे रोशनी बिखरी और टुकडो में गायब हो गई, फिर एक आकृति प्रकट हुई जो हवा में तैर रही थी, मोती की तरह सफ़ेद और पारदर्शी थी.

“अह्ह्ह, स्वागत हैं मेरे नन्हे दोस्त, मैं हूँ एस्कॉर्ट का भूत”-हवा में तैरते हुए उसने नन्ही जान से कहा, इतना कहते ही बच्चे ने रोना बंद कर दिया.

रोने की आवाज बंद होते ही राजा, सेनापति, सिपाही जो जहाँ था वहीँ रुक गया.

“मुझे तुमसे मिलकर ख़ुशी....”-भूत ने अपनी आँखें छोटी और भौंहे चढाते हुए बोला “....और शायद तुम्हे भी”

“रोना क्यूँ बंद कर दिया मेरे नन्हे दोस्त, तेरी रोने की आवाज सुनकर ही तो राजा तुझे ढूंढ पायेंगा, फिर वो तुझे अपने साथ महल लेकर जायेंगा और तू बनेंगा एस्कॉर्ट का राजकुमार”

नन्हीं जान निडर आँखों से भूत की तरफ देख रहा था.

“रोने की आवाज अचानक कैसे बंद हो गई?”-राजा के माथे पर चिंता की सलवटे पड़ने लगी थी, उन्होंने नेफ्थन की तरफ देखा.

“कहीं कोई जंगली जानवर....”-नेफ्थन ने अपनी शंका जाहिर की.

राजा ने नेफ्थन के चेहरे पर से परेशानी भरी निगाहें हटायी.

“रोना शुरू कर मेरे प्यारे राजकुमार, क्यूँ मेरी मेहनत पर पानी फेर रहा हैं”-भूत अभी भी उसके ऊपर हवा में गोते लगा रहा था.

नन्ही जान की निडर आँखें अभी भी भूत पर टिकी थी.

“लगता हैं तुझे मेरी शक्ल कुछ ज्यादा ही पसंद आ रही हैं”-इतना कहते ही भूत ने चुटकी मारी और बिखारे सितारों के बीच गायब हो गया. भूत के गायब होते ही बच्चे ने दुबारा रोना शुरू कर दिया.

                 राजा ने राहत की सांस ली और इस बार सैनिकों को आदेश दिए बिना ही स्वयं आवाज की दिशा में आगे बढे. सेनापति, सिपाही राजा के पीछे-पीछे चल पड़े. तभी राजा के ऊपर एस्कॉर्ट का भूत प्रकट हुआ, वो किसी को भी नजर नहीं आ रहा था.

“बस सीधा चलते रहो, एकदम सही जा रहे हो”-भूत की आवाज भी कोई नहीं सुन पा रहा था.

                      राजा ने अपने सामने से झाडिया हटाते ही उन्हें बच्चा दिखाई पड़ा. राजा क्रिस्टन भागकर पोटली के पास गया, अपने हाथों में बच्चे को उठाया, बच्चे ने भूत को देखते ही रोना बंद कर दिया. राजा बेहद प्रसन्न दिखने लगा था. बच्चा अपना हाथ-पैर हिला रहा था लेकिन उसकी नजरें राजा की नजरों को घुर रही थी.

“सेनापति नेफ्थन, लगता हैं तुम्हारी पुकार ऊपर वाले ने सुन ली”-क्रिस्टन ने नेफ्थन की और देख जाहिर किया की उन्हें उनका उत्तराधिकारी मिल गया.

“ताज्जुब की बात हैं राजन कितना जल्द हमारी समस्या का समाधान हो गया, आज का दिन एस्कॉर्ट राज्य के लिए जश्न का दिन हैं”

“तुम जाकर राज्य में ऐलान करो की राजा क्रिस्टन एस्कॉर्ट के राजकुमार के साथ आ रहे हैं”- नेफ्थन ने एक सिपाही को आदेश दिया. भूत मुस्कुराते हुए तालियां पीटने लगा. आदेश मिलते ही सिपाही घोड़े पे सवार राज्य की तरफ रवाना हुआ. राजा ने मासूम का माथा चूमा और उसे सीने से लगा दिया.
 
कहानी अभी बाकी हैं....


अगली कड़ी:- दी एस्कॉर्ट हार्ट -2- (दी मैजिशियन विच आलिना)

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