दिल्ली की एक एम.बी.ए. कॉलेज की कैन्टीन की टेबल नंबर 26 पर चार दोस्त रंजन, साफीना, नितिन और आर्विरा अपने एक दोस्त हार्दिक के आने का इंतज़ार कर रहे थे| सब बेहद खुश दिख रहे थे,  आख़िरकार वो आज एक साल के बाद जो मिल रहे थे| एक साल पहले पांचो ने इसी कॉलेज से एम.बी.ए पास आउट किया था, तब किसी ने सोचा नही था की वे इतना जल्दी मिल जायेंगे| आज वे सब अपनी-अपनी ज़िन्दगी से खुश थे क्यूंकि जो उन्हें चाहिए था वो सब तो ना मिला लेकिन जितना भी मिला उससे वे संतुष्ट थे सिवाय हार्दिक के|
रंजन एक मोबाइल कंपनी खोलना चाहता था लेकिन आज वो एक छोटी सी मोबाइल कंपनी में एक मैनेजमेंट का काम करता था|
साफिना फैशन डिज़ाइनर बनना चाहती थी, लेकिन पैसो की तंगी की वजह से आज वो एक लेडी टेलर थी|
नितिन महंगी कारो का शो-रूम खोलना चाहता था, लेकिन आज वो अपने स्वर्गीय मामा के ऑटोमोबाइल्स के शो-रूम का मालिक था|
आर्विरा किसी छोटी-बड़ी बैंक की मेनेजर बनना चाहती थी, लेकिन आज वो एक बैंक में हेड-केशियर थी|
क्या लगता हैं, हार्दिक आयेंगासाफिना ने कॉफ़ी का मग अपने खुबसूरत होंठो से छुते हुए पूछा|
पता नहीं, आ भी जाए और ना भी आयेनितिन ने जवाब दिया|
शायद नहीं आयेंगाआर्विरा ने अपना पक्ष रखा|
आई थिंक आर्विरा सही कह रही हैं, वो नहीं आयेंगा, आज से एक साल पहले याद हैं क्या हुआ था आखिरी दिनरंजन ने चिप्स का पैकेट खोलते हुए कहा|
एक साल हो गया उस बात को अब तो वो भूल गया होंगासाफिना समोसे के लिए छोटू को आवाज देते हुए कह रही थी|
तभी उसकी कुहनी से पानी का ग्लास फर्श पर गिर गया, फर्श पर फैलता पानी अतीत की एक कडवी याद दिखने का प्रयास कर रहा था...
एक साल पहले....

सभी पांचो दोस्त चिल्लाते हुए कैन्टीन की तरफ भाग रहे थे, आज उनकी एम.बी.ए का आखिरी इम्तिहान भी हो गया था| सबके गाल ख़ुशी में लाल हो गये थे, पर उनकी आँखों की हलकी सी चमक साफ़ जाहिर कर रही थी की वे उदास भी थे की आज के बाद पता नही फिर कब मिलेंगे| टेबल नंबर  26 उनकी लकी टेबल थी, रोज वहीँ बैठते थे और आज भी| लकी टेबल पीछे भी सबकी एक कहानी थी की इस टेबल ने बहुत कुछ दिया था इन दोस्तों को| यह सभी इसी टेबल पर सबसे पहले मिले थे| फर्स्ट और सेकंड सेमेस्टर में आर्विरा के बेक आई थी लेकिन जिस दिन थर्ड सेमेस्टर का रिजल्ट डिक्लेअर हुआ उस दिन आर्विरा इसी टेबल पर लंच कर रही थी और उसका रिजल्ट आल क्लियर था| रंजन एक दिन इसी टेबल पर बैठा बहुत रो रहा था क्यूंकि मुंबई में उसके पापा के किडनी का ऑपरेशन चल रहा था और थोड़ी देर बाद उसके फ़ोन आया की ऑपरेशन सक्सेसफुल रहा| नितिन और साफिना को अपना-अपना प्यार इसी टेबल पर बैंठे मिला था| हार्दिक, उसे इस टेबल से मिला कुछ भी नही पर वो अपनी ज़िन्दगी से बहुत खुश था क्यूंकि वो जो चाहता था उसे सब मिल जाता था और उसे इतने अच्छे दोस्त भी तो इसी टेबल पर मिले थे|
तो क्या सोचा अपने फ्यूचर का?हार्दिक बारी-बारी से सबकी तरफ देखने लगा|
सब ऐसे चुप हो गये मानो सांप सूंघ हो गया हो सबको और एक दुसरे की तरफ ऐसे देखने लगे जैसे उन्हें बॉर्डर पर भेजा जा रहा हो|
अबे बोलो भी कमीनो शहीद होने के लिए नहीं भेज रहा हूँ, वैसे भी अपने कॉलेज में कैंपस प्लेसमेंट तो इस साल होगा नहीं, कम ऑन टेल मी
यार, पक्का तो नही बोल सकता थोडा-थोडा पता हैं करना क्या हैं आगेरंजन ने अपनी बैचेनी जाहिर की|
सभी ने रंजन का समर्थन किया|
हाँ तो थोडा थोडा ही बता दे
मोबाइल कंपनी खोलनी हैंरंजन ने जवाब दिया|
फैशन डिज़ाइनरसाफिना ने जवाब दिया|
महंगी कारो का शोरूमनितिन ने जवाब दिया|
बैंक मेनेजरआर्विरा ने जवाब दिया|
हार्दिक सबके जवाब सुनकर जोर जोर से हँसने लगा|
कुत्ते हँसता ही रहेंगा या फिर खुद भी कुछ बताएगानितिन ने हार्दिक के सीर पर मारते हुए बोला|
कितने छोटे लोग हो तुम, छोटी बातें करते हो वो भी हार्दिक के दोस्त होकर, एकदम बकवास फ्यूचर हैं, मोबाइल कम्पनीज इतनी हैं बाजार में तू क्या उखाड़ लेंगा उनका, फैशन डिज़ाइनर कपडे ही सिलने थे तो एम.बी.ए. क्यूँ किया, महंगी कारो का शो-रूम खुद तो पहले कार खरीद ले, बैंक मेनेजर..आज दिन तक सारे एग्जाम्स बेक से क्लियर किए हैं बैंक-मेनेजर का एग्जाम क्लियर हो जायेंगा तेरे से, योर ड्रीम्स माय फूट
व्हाट द हेल हार्दिक, तुम इस तरह हमारे सपनो का मजाक नहीं उडा सकते, तुम इंटेलीजेंट हो, 80-90% लाते हो तो क्या हो गया, हमारी भी अपनी एक लाइफ हैं और तुम क्या तीर मारने वाले हो जरा बतओंगे हमेंआर्विरा आगबबुला होने लगी|
मेरा ऐसा कोई सपना नहीं की मुझे यह बनना हैं....वो बनना हैं, मुझे सिर्फ एक चीज़ चाहिए ज़िन्दगी में और वो हैं विटामिन-एम, मनी, मुझे पैसा कमाना हैं, बहुत सारा
नितिन जोर से हंसने लगा| सब उसकी तरफ जिज्ञासा भरी निगाहों से देखने लगे|
सब तेरे रिश्तेदार ही रहते हैं ना हिन्दुस्तान में, जो तुझे आगे से बुलायेंगे की हार्दिक साहब आओ हमारे यहाँ काम करो, हम आपको 1 लाख देंगे महीने का, क्या हुआ पसंद नही आया?....2-3 आप बोलो कितना चाहिएनितिन, हार्दिक के विटामिन-एम का मजाक उडा रहा था|
नितिन के इस संवाद पर बाकी सब भी अपनी हंसी न रोक पाए| हार्दिक का चेहरा गुस्से में तब्दील हो रहा था|
हाँ तो तेरे पापा महंगी कारे साफ़ करते-करते शो-रूम खोल ही देंगेहार्दिक, नितिन से कुछ ज्यादा ही आगे निकल गया, उसने सीधा ही उसके पापा की बेईज्ज़ती कर दी, दरअसल नितिन के पापा दिल्ली के सबसे बड़े बिज़नसमैन के वहाँ ड्राईवर थे, नितिन छोटा था तब अपने पापा के साथ जाया करता था, बस तभी से उसे महंगी कारो का शौक लग गया|
नितिन ने अगले ही पल कॉफ़ी के मग पर हाथ से जोर से प्रहार किया, फर्श पर गिरते ही मग छोटे-छोटे टुकड़ो में बंट गया था| कैन्टीन में बैंठे सब एकदम चौंक गये| नितिन ने बिना पलक झपकाए ही हार्दिक को चांटा लगा दिया| हार्दिक ने भी जवाब देने में देर न लगाई, कॉफ़ी नितिन के चेहरे पे फेंक दी| रंजन, साफिना और आर्विरा को अंदेशा भी नही था की इतना जल्दी कुछ बदल जायेंगा| हार्दिक और नितिन दोनों हाथापाई पर उतर आये थे, उनके बाकी साथी बिच-बचाव कर रहे थे, लेकिन 4-5 घूंसे हार्दिक-नितिन ने आपस में बाँट लेने के बाद ही शांत हुए|
देख लेना हरामजादे तुझे एक दिन तेरी असली औकाद दिखाऊंगाहार्दिक शर्ट ने कॉलर ठीक करते हुए नितिन को चेतावनी दी|
हार्दिक ने जाते-जाते अपने पास रखी चेयर को जोर से लात मारी|
साफिना दीदी, समोसेकैन्टीन के छोटू ने उन सबको बुरी यादों से हकीकत में ले आया|
दो घंटे बीत चुके थे हार्दिक अभी तक नही आया था|
नितिन, प्लीज कण्ट्रोल करना यार, जो कुछ भी हुआ सब भूल जाना, हम फ्रेंड्स थे, हैं और रहेंगेआर्विरा ने नितिन से रिक्वेस्ट की|
एम ओके यार, वो तो मेरा सबसे अच्छा दोस्त था, हम दोनों ने क्या-क्या कारनामे किए कॉलेज में साथ में तुमको तो पता ही हैं ना, बस वो फिर से किसी बात का बवंडर ना बनाएंनितिन ने अपनी दिल की बात बताई|
था का क्या मतलब हैं यार, वो आज भी अपना अच्छा....वो देखो हार्दिक आ गयारंजन बोला|
सब ने अपने ख़ुशी से भरे चेहरे दरवाजे की तरफ फेर लिए, लेकिन अगले ही पल सबके चेहरे पर परेशानी के भाव पैदा होने लगे|
कॉलेज के दिनों में अपनी स्टाइल से सबको दीवाना बनाने वाला हार्दिक पारगी काफी बदला सा लग रहा था| बाल बिखरे हुए, पसीना में भीगा चेहरा, ना पहले जैसी चमक, टाई को कुछ ज्यादा ही लूस कर रखा था, शर्ट का एक हिस्सा पेंट के अंदर, दूसरा बाहर, थका सा, परेशान सा हार्दिक कैन्टीन की टेबल नंबर 26 के नजदीक बढ़ रहा था| टेबल के नजदीक पहुँचते ही सब उससे गले मिलने लगे, सबके चेहरे पर फिर से एक मुस्कान लौट आई, पर हार्दिक की मुस्कान सिर्फ दिखावा थी| सब बैठ गये|
यार, यह क्या हाल बना रखा हैंनितिन ने पूछा|
वो कुछ नही यहीं पास में एक इंटरव्यू देने गया था, इतनी गर्मी हैं हुलिया ही बिगड़ गयानितिन काफी धीरे-धीरे बोल रहा था|
इंटरव्यू किस चीज़ का, तेरे पास तो जॉब हैं ना, फिरसोफिना को सवाल पूछने में एक पल का समय भी व्यर्थ नही करती|
तुम्हे कैसे पता, मेरे पास जॉब हैंहार्दिक सबके चेहरे की तरफ देखने लगा|
कमीने तू हमे एक साल तक कॉल नही करेंगा तो हमे पता नही चलेंगानितिन मुस्कुराते हुए बोला|
तुम सबका क्या चल रहा हैं लाइफ में
सब ने अपने-अपने बारे में बताया|
हार्दिक ने अपने होंठो को छूने वाले कॉफ़ी के मग की तनिक ही टेबल पर रखा|
तो यह बात हैं
क्या बात हैं?आर्विरा ने पूछा|
तब तो तुम सबको पता ही होंगा की मैं कितना कमाता हूँ महीने का
तू कहना क्या चाहता हैं खुलकर बोल नारंजन ने अपनी मंशा जाहिर की|
अब इतना भी मत बनो यार, मुझे यहाँ तुम सबने नीचा देखने के लिए बुलाया हैं ना
यार, तूने अपने दिमाग का इलाज अभी तक नही करवायानितिन ने फिर मजाक उड़ाया|
तुम सबको पता हैं की मैं महीने के सिर्फ 18000 कमाता हूँ और मुझे अभी तक वो सबकुछ नही मिला जो मैं चाहता था, तुम सब तो 30000 के उपर वाले हो ना और जो छोटे सपने देखे थे, उससे भी छोटा हिस्सा तुम्हे मिल गया, और तुम सब खुश हो तो मुझे दिखाना चाह रहे हो की देख हार्दिक देख पैसा बड़ा नहीं होता सिर्फ सपने बड़े होते हैं और तू नितिन मैंने तुझे तेरी असली औकाद दिखाने की बात कही थी, पर तूने मुझे दिखा दी, यू विन ब्रदर, चियर्स, बट मैं अभी तक हारा नहीं हूँ तुम सबसे एक दिन आगे निकल कर दिखाऊंगा, यह मेरा वादा हैं तुमसे, थ्न्कू सो मच मुझे मेरी असली औकाद दिखाने के लिए हार्दिक ने जोर से टेबल पर हाथ मारते हुए वहाँ से रवाना हुआ|
कोई कुछ नही बोला जवाब में बस सब उसे जाते हुए देख रहे थे, कहने को उनके पास कुछ नही बचा था, तभी आर्विरा की आँखें गीली होने लगी थी, साफिना ने उसे गले से लगा दिया, सब मायूस हो गये थे, इसलिए नही की हार्दिक ने इतना सबकुछ उन्हें सुनाया, बल्कि इसलिए की एक अच्छा दोस्त उन्होंने खो दिया था| जिस दोस्त का इंतज़ार वो पिछले 2 घंटे से कर रहे थे उसने 2 मिनट में ही अलविदा कह दिया|
हार्दिक ने बहुत तक जगह इंटरव्यू दिए लेकिन सफल नही हुआ, वो दुसरो से आगे निकलने की आग में जल रहा था| आखिर एक दिन उसे एक जॉब मिल गयी जिसकी सैलरी थी 20000, हार्दिक ने अपनी पुरानी जॉब नये जॉब के लिए छोड़ दी, आखिर 2000 ज्यादा जो मिल रहे थे|
2 महीने बीत चुके थे, दुनिया पर एक ऐसा हमला होने वाला था जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी, मंदी| सभी देशो की अर्थव्यवस्था डगमगाने लगी| सभी कम्पनीज ने नए एम्प्लोई से हाथ हटाने लगी और उन नए एम्प्लोई में हार्दिक भी था, अगर वो पुरानी जगह ही जॉब पर कायम रहता तो उसके पास 14 महीने का वर्किंग पीरियड होता तो वह बच जाता, लेकिन सिर्फ २ महीने हुए उसे नयी कंपनी में जोइनिंग किए|
हार्दिक, हिन्दुस्तान के करोड़ो बेरोजगारों का हिस्सा बन चुका था, पढाई में अव्वल रहने वाले हार्दिक ने विटामिन-एम के चक्कर में अपने ही पैरो पर कुल्हाड़ी मार दी थी|
उसके पापा को उसकी चिंता नही थी क्यूंकि उनकी लाइफ तो सेट थी, उन्होंने तो बहुत समझाया था हार्दिक को जॉब मत छोड़, थोड़े दिन टिका रह, अपने टैलेंट से लोगो को इम्प्रेस कर, सैलरी भी बढ़ जायेंगी, आखिर उनको तो जिंदगी का तजुर्बा था की पैसे कमाने का कोई शॉर्टकट नही होता, बहुत मेहनत-लगन से काम करना पड़ता हैं|
हार्दिक अपने माता-पिता के साथ डिनर कर रहा था|
तो क्या सोचा अब आगे का, पूरी ज़िन्दगी भर तो मुफ्त की रोटियां नही खिला सकता तुझेहार्दिक के पापा बड़ी सख्ती से पेश आये|
हार्दिक के मुंह में रखा हुआ निवाला नीचे उतरने से पहले ही रुक गया था|

जॉब ढूंढ रहा हूँ पापाहार्दिक ने विनम्रता से जवाब दिया|
तेरे दादाजी जॉब छोड़ कर गये हैं क्या तेरे लिए जो जॉब मिल जायेंगी तुझे, मार्केट की हालत देखी, कभी न्यूज़पेपर उठा कर देखा, जॉब ढूंढ रहा हैं
आप ठंड रखो ना, कोशिश कर रहा हैं ना वोहार्दिक की माँ हर माँ की तरह उसका समर्थन कर रही थी|
क्या ख़ाक कोशिश करेंगा, हाथ में लड्डू था फिर भी इन जनाब को पेड़े खाने थे
पापा, आप कुछ रूपयो की मदद कर दे तो मैं एक छोटा सा बिज़नस खोलना चाहता था, शेयर-ब्रोकर का
रूपयो की मदद चाहिए, बचपन से मदद ही कर रहा हूँ तेरी, तू कब हमारी मदद करेंगा
अब मंदी को तो मैं रोक नहीं सकता ना, इसमें मेरा क्या कसूरहार्दिक, निवाला प्लेट में रखते हुए बोला|
कसूर तो मेरा ही हैं जो मैंने तुझे सपने देखना नही सिखायाउसके पापा की आँखों में गुस्सा तेज़ होने लगा था|
हाँ, तो नहीं देखने मुझे सपने, मुझे बस पैसे कमाने, चाहे कुछ भी करना पड़ेहार्दिक चिलाया|
कुछ भी, तो अब तू डाका डालेंगा
हाँ, अगर कोई पापा अपने बेटे को रूपये नहीं देगे तो यही करना पड़ेंगाहार्दिक ने अपने हाथ जोर से टेबल पर मारे|
स्टैंड-उप
व्हाट?
आई सेड स्टैंड उप एंड गेट आउट ऑफ़ माय हाउस
अरे! थोडा तो सच समझकर फैसला करोउसकी माँ बीच में ही बोल पड़ी|
आप चुप रहिये, यह मेरा और इसके बीच का मामला हैं, आप ना बोले तो बेहतर होंगा, गेट ऑफ़ माय हाउस
हार्दिक चुपचाप उठकर अपने कमरे में चला गया, रोना तो बहुत आ रहा था उसे पर वो अपने आप को काबू मैं कर रहा था, एक बैग में कुछ कपडे डाले और निकल गया से घर से बाहर| उसकी माँ बहुत रो रही थी, पर अपने पति के आदेश के खिलाफ नहीं जा सकती थी|
रात को दस बजे हार्दिक एक मैला सा थैला लेकर सुनसान सडको पर चल रहा था| जो दोस्त थे उससे तो उसने पहली ही दूरियां बना ली थी, पिता ने उससे दूरियां बना ली, अब तो कोई नहीं था उसका उसके सिवा| उसके दिमाग में अभी भी बिज़नस चल रहा था, उसने आज सुबह के पेपर में किसी सक्सेसफुल बिजनेसमैन के बारे में पढ़ा था जिसने सिर्फ २ साल में ही आसमान की बुलुन्दियाँ छु ली तो वो सोचने लगा शायद पैसे बिज़नस से ज्यादा जल्दी कमाया जा सकता हैं|
हार्दिक के जेब में सिर्फ 276 रूपये थे और बैंक अकाउंट में 1389 रूपये इससे उसे लखपति-करोडपति बनना था|
दोस्तों से वो मिलना नहीं चाहता था, क्यूंकि वो अपने आप को इतना कमजोर नही दिखाना चाहता था की वो पैसो के लिए उनके सामने हाथ फैलाए| हार्दिक अपने नजदीकी रिश्तेदारों के वहाँ भी गया, वो उसकी मदद करने के लिए तैयार थे, पर जैसे ही हार्दिक ने उनसे कहा की घर पर मम्मी-पापा को कुछ मत बताना तो उन्हने पैसे देने से इंकार कर दिया|
सुबह एक चाय होटल पर खुद से ही बर्बाद हार्दिक चाय की चुस्कियो के साथ अख़बार पढ़ रहा था, तभी उसकी नजर होटल के पिछवाड़े पर पड़ी, एक काला सा सांड सा युवक किसी दुसरे टपोरी की कोकीन दे रहा था, बदले में उसे 1000-1000 की 100 नोट मिली, मतलब एक लाख रूपये| टपोरी वहाँ से चल गया| हार्दिक ने अख़बार झट से जमीन पर पटका और उस काले सांड की तरफ बढ़ा|
मुझे आपकी मदद की जरुरत हैं
कौन हैं अबे तूकाले युवक कड़क आवाज में बोला|
प्लीज मेरा इस दुनिया में कोई नहीं हैं, मुझे पैसो की बहुत जरुरत हैं, प्लीज मुझे काम पर रख लो, जो काम जैसा काम मैं करूँगाहार्दिक जोड़कर विनती करने लगा|
जो काम जैसा काम करेंगा
हाँ करूँगा
चल मेरे साथ
काला युवक हार्दिक को उसके बॉस के अड्डे पर लेकर गया| बहुत सारे ड्रग्स-बन्दूको के बॉक्स पड़े थे वहाँ पर| बहुत सारे गुंडे हथियारों के साथ थे| हार्दिक पसीना-पसीना हो रहा था| उसके मन में डर सता रहा था की कुछ गलत ना हो जाए|
उनका बॉस 6 फूट का लम्बा-चौड़ा-तगड़ा सांवला था|
बॉस, आपको एक शरीफ लौंडे की तलाश थी ना, मैं ले आया
बॉस हार्दिक को उपर से नीचे तक घूरने लगा|
क्या गारंटी यह भरोसे के लायक हैं?बॉस ने काले युवक से पूछा|
एक बार भरोसा कर लो प्लीज, मुझे पैसो की बहुत जरुरत हैंहार्दिक सिर से विनती करने लगा|
ठीक हैं तो काम यह हैं की तुम्हे एक न्यूज़ रिपोर्टर बनकर पुलिस हेडक्वार्टर जाना हैं, पुरे हेडक्वार्टर की तस्वीरे खिंच कर लानी हैं, अगर यह काम तुम कर लेते हो तो मैं तुम्हे पचास हजार रूपये दूंगा  
मैं करूँगा, मुझे एक लाख चाहिएहार्दिक ने अपनी ख्वाहिश जाहिर की|
नहीं, सिर्फ पचास हजार, पचास हजार उधार दे सकता हूँ एक महीने में चुकाना पड़ेंगा
ठीक हैं मुझे मंजूर हैं
अपने फ़ोन नंबर हमे दे दो, तुम्हे यह काम कब और कैसे करना हैं बता दिया जायेंगा
हार्दिक एक न्यूज रिपोर्टर बनकर हेडक्वार्टर में घूस गया बड़ी आसनी से चुपके से वो अंदर की तस्वीरे खींचने लगा, लेकिन हर एक तस्वीर पर उसे नितिन की याद आती| कॉलेज में वो और नितिन दोनों मिलकर चुपके से मोबाइल से लड़कियों की तस्वीरे खिंचा करते थे, उनके पास कॉलेज की सारी गर्ल्स की तस्वीरे थी| इस काम में वो काफी माहिर था| उसने अपने काम को बखूभी निभाया| उसे एक लाख रूपये मिल गये थे| वो बहुत खुश था|
उसने एक छोटा सा शेयर-ब्रोकर का ऑफिस खोल दिया| पैसे कमाने की भूख उसकी बढती जा रही थी| उसने उस बॉस के साथ कई गैर-कानूनी काम में साथ दिया| हर बार जो रकम मिलती, हार्दिक उसकी डबल लेता उधारी पर| बॉस के काले धंधो का नशा उसके रूह के अंदर उतरने लगा था, वो बॉस के द्वारा आयोजित रेव पार्टीज में जाता और ड्रग्स लेने लगा था| वो करना तो नहीं चाहता था लेकिन विटामिन-एम के लिए उसे यह सब जायज लग रहा था|
लेकिन उसकी रूठी किस्मत रूठी हुयी थी| शेयर-ब्रोकर की ऑफिस उसे मुनाफा देने में नाकाम रही, तो उसने शेयर-मार्किट में खूब पैसा लगाया लेकिन डूबती अर्थव्यवस्था में उसका सारा पैसा डूब गया| वो फिर से कंगाल होने वाला था| बॉस को इस बात की भनक लगी थी, तो उसने भी अपने हाथ खिंच लिए| वो अपने आदमी भेजता की उसकी उधारी का पैसा चुकाए, नहीं तो वो उसे जान से मार डालेंगे|
काफी दिनों तक हार्दिक उन्हें समझाता रहा की वो दे देंगा बहुत जल्दी, लेकिन एक दिन सारी हदें पार हो गयी, बॉस के कुछ आदमियों ने उसके पैरो के आस पास फायर की और आखिरी चेतावनी दी की 7 दिन के अंदर पैसा नहीं चुकाया तो खेल ख़त्म|
हार्दिक बहुत तरह से डर चुका था, उसे हर वक़्त मौत का डर सताने लगा| अंदर ही अंदर उसका दम घुट रहा था| वो निराशा के समुंदर में गोते लगा रहा था| हार्दिक धीरे-धीरे डिप्रेसन का शिकार हो रहा था| आखिर उसने ऐसा रास्ता अपनाया जो उसकी ज़िन्दगी की सबसे बड़ी गलती थी, वो डिप्रेसन से बचने के लिए ज्यादा ड्रग्स लेने लगा, पूरी टाइम ड्रग के नशे में ही रहता| उसकी तबियत और खस्ता होती जा रही थी| उसमें चलने फिरने की भी हिम्मत नहीं बची थी, बस पुरे दिन डर की चादर ओढ़कर लेटा रहता था|
6 दिन बीत चुके थे हार्दिक पैसे का बंदोबस्त करने में नाकाम रहा था| उसने बड़ी मुश्किल से हिम्मत जुटाकर साफिना को कॉल लगाया|
हेल्लो, साफीदबी-दबी आवाज से बोला|
हार्दिक, व्हाट ए सरप्राइज यार कहाँ हैं तू
मुझे तुम सबसे मिलना हैं, प्लीज मना मत करना, एक बार, शायद आखिरी बार, टेबल नंबर 26 पर, मैं रिक्वेस्ट करता हूँ हाथ जोड़करहार्दिक की आवाज रोने सी होने लगी थी|
दोस्तों से कभी रिक्वेस्ट की जाती हैं क्या, हम पक्का मिलेंगे बोलो कब मिलना हैं
थ्न्कू सो मच, कल सुबह 10 बजे, और मेरी तरफ से सबसे रिक्वेस्ट करना
और फ़ोन काट देता हैं|
सुबह की 11:30 होने आई थी| सब दोस्त हार्दिक के आने का इंतज़ार कर रहे थे, वे उसे बार बार कॉल लगा रहे थे पर वो नहीं उठा रहा था| सब परेशान थे की उसने ही सबको अचानक मिलने बुलाया और वो खुद अभी तक नहीं पहुंचा था|
तभी हार्दिक आ पहुंचा| आँखें लाल, काफी दिनों से सोया नहीं था वो, आँखों के नीचे काले धब्बे, चेहरे पे हल्की-हल्की झुर्रिया, बाल थोड़े झड़ने लगे थे, सौ फीसदी बीमार, लड़खड़ाते हुए चल रहा था, उसके देखते ही सब फटाक से खड़े हो गये|
हार्दिक धीरे-धीरे उनके पास पहुँचा, उनके सामने थोड़ी ही दुरी पर रुका और हाथ जोड़कर बोला आई ऍम रियली सॉरी, हो सके तो मुझे माफ़ कर देना|
और ज़मीन पर बेहोश गिर गया| सभी दोस्तों की साँसे पल भर के लिए रुक गयी, सब हार्दिक-हार्दिक चिल्लाने लगे| रंजन उसके चहरे पर पानी के छींटे मारने लगा, लेकिन उसे होश नहीं आया| नितिन ने 108 पर कॉल कर एम्बुलेंस बुलायी|
हॉस्पिटल में काफी देर तक डॉक्टर उसका चेक-कप कर रहे थे| बाहर सभी दोस्त भगवान से दुआ कर रहे थे की उसे होश आये जाए| तभी कुछ मिनट्स के बाद डॉक्टर बाहर आये...सारी दोस्तों ने से चिंता भरे कदम डॉक्टर की तरफ बढ़ाये|
डॉक्टर, हार्दिक कैसा हैं
डॉक्टर ने अपना चश्मा आँखों से हटाया....
ऍम सॉरी, ही इस डेड, ज्यादा मात्रा में ड्रग्स के सेवन से दिल ने काम करना बंद कर दिया था, उसके माता-पिता को बुला दो, कुछ फॉर्मेलिटी पूरी करनी हैं

जो जहाँ खड़ा था बस वहीँ स्थिर हो गया, आँखें खुली तो खुली रह गयी, ना आवाज, ना साँसों की रफ्तार, मानो हार्दिक की रूह के साथ सब कुछ हवा में छूमंतर हो गया हो| आंसुओ की रफ़्तार धडकनों की रफ्तार से तेज़ हो गयी थी| बस फर्श पर गिरती हर एक बूंद के साथ कॉलेज के यादों के झरोखे बह रहे थे|
दूसरी तरफ, कॉलेज की कैन्टीन में छोटू की जगह नया लड़का काम पर आया था| वो टेबल नंबर 26 को साफ कर रहा था, तभी अचानक वो रुक गया, कपडा चेयर पर रखकर जेब से एक कागज़ निकाला, एक स्टीकर था और उसने वो स्टीकर टेबल नंबर 26 पर चिपका दिया.... उस स्टीकर पर लिखा था....

सपनो का पीछा करो, पैसो का नहीं, ज़िन्दगी का दूसरा नाम सपने हैं